हिन्दी कहानियों का संग्रह
हर कहानी,
एक नई दुनिया।
छोटी, मौलिक हिन्दी कहानियाँ: कभी आँखें नम करने वाली, कभी होंठों पर मुस्कान लाने वाली। हर कहानी कुछ ही मिनटों में पढ़ी जा सकती है, कहीं भी, किसी भी समय।
- ५०कहानियाँ
- १०श्रेणियाँ
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चुनिंदा कहानियाँ
हर श्रेणी से एक कहानी, ताकि आप अपनी पसंद का स्वाद पहले चख सकें।
- बाल-कथा
तीसरी घंटी
गणित से डरने वाले छोटू और चपरासी काका की घंटी।
- भावनात्मक
आख़िरी बस
आख़िरी बस के कंडक्टर का एक नियम और एक लड़की की देर रात की वापसी।
- सामाजिक
सब्ज़ीवाली अम्मा
पैंतीस बरस की तराज़ू, एक अफ़सर और बदलता नियम।
- प्रेरक
नदी किनारे का मास्टर
बाढ़ में बह गए ब्लैकबोर्ड के बाद भी न रुकने वाली एक पाठशाला।
- रहस्य
सन्नाटे की आवाज़
पुरानी हवेली में हर रात दो बजे की ठक-ठक का राज़।
- लोककथा
लालटेन
एक गाँव की लालटेन, जिसकी रोशनी बाँटने से कम नहीं होती।
पूरा संग्रह
सारी कहानियाँ
श्रेणी के अनुसार सजी हुई। किसी भी कार्ड पर टैप करके कहानी खोलें।
बाल-कथा८ कहानियाँ
तीसरी घंटी
गणित से डरने वाले छोटू और चपरासी काका की घंटी।
गुल्लक
लाल साइकिल के लिए जमा किए पैसे और किसी की दवा।
नन्हा बीज
अँधेरी मिट्टी में एक बीज और उसके अनजान मददगार।
मिट्टी का घोड़ा
टेढ़ी टाँग वाला घोड़ा और उसकी सही दोस्त।
चींटी की सभा
नन्ही चिंकी और सबसे ज़रूरी काम: ध्यान से देखना।
चाँद का टुकड़ा
आरव चाँद माँगता है और चाँदनी बाँटना सीखता है।
गुड़िया का घर
पीहू का टेढ़ा गुड़िया-घर और सच्ची सहेली की सीख।
नन्ही परी की साइकिल
साइकिल सीखती परी और पीछे छूट गए भैया के हाथ।
भावनात्मक८ कहानियाँ
आख़िरी बस
आख़िरी बस के कंडक्टर का एक नियम और एक लड़की की देर रात की वापसी।
पुराना रेडियो
कबाड़ में बिकने जा रहे रेडियो में दादाजी की छोड़ी हुई चिट्ठी।
पहला वेतन
पहली तनख़्वाह और पिताजी के घिसे हुए जूते।
दादी का संदूक
दादी की डायरी में बड़ी होती मिनी की हर पहली बात।
अम्मा की साड़ी
हरी साड़ी की उधड़ी ज़री और एक छोटी-सी कढ़ी हुई चिड़िया।
ताला और चाबी
बिना भाव लगाई गई एक रात की मदद, जो बरसों बाद लौटी।
चिट्ठी का इंतज़ार
पहाड़ के डाकिये और एक माँ के इंतज़ार की कहानी।
घड़ी की सुई
चार बजकर दस पर रुकी घड़ी और आदित्य की तरकीब।
सामाजिक६ कहानियाँ
सब्ज़ीवाली अम्मा
पैंतीस बरस की तराज़ू, एक अफ़सर और बदलता नियम।
दीये की क़ीमत
बदलते बाज़ार में कुम्हार सुखिया के दीये और उनका नाम।
बरगद की छाँव
सड़क और पुराने बरगद के बीच गाँव का एक समझदार फ़ैसला।
ग्यारह रुपये
रिक्शेवाले बिरजू की ईमानदारी और एक नई नौकरी।
पंचायत का नल
एक नल, एक झगड़ा और एक छात्रा का सीधा-सा हल।
काले बादल वाला दिन
एक तिरपाल, दो किसान और पड़ोस का धर्म।
प्रेरक५ कहानियाँ
नदी किनारे का मास्टर
बाढ़ में बह गए ब्लैकबोर्ड के बाद भी न रुकने वाली एक पाठशाला।
सुखिया की साइकिल
एक लड़की, एक जंग लगी साइकिल और पूरे गाँव का नया रास्ता।
तीन सवाल
सबसे अच्छा समय, सबसे ज़रूरी इंसान और सबसे ज़रूरी काम।
ईमानदारी की तराज़ू
बाट के नीचे दबी कमाई और भरोसे की बड़ी कमाई।
आख़िरी बेंच
अटकने वाले अमन को मिली एक टीचर की धीरज भरी राह।
रहस्य५ कहानियाँ
सन्नाटे की आवाज़
पुरानी हवेली में हर रात दो बजे की ठक-ठक का राज़।
चाबी का गुच्छा
चार चाबियाँ, चार ताले और दादाजी का छिपा हुआ भरोसा।
खोई हुई आवाज़
हर आधी रात बजती धुन और तीसरी मंज़िल का राज़।
भूत वाला कुआँ
कुएँ की डरावनी आवाज़ और उसके पीछे का सच।
तस्वीर के पीछे
दीवार के खाँचे में मिला एक लोहे का डिब्बा।
लोककथा४ कहानियाँ
लालटेन
एक गाँव की लालटेन, जिसकी रोशनी बाँटने से कम नहीं होती।
सच बोलने वाला आईना
एक राजा, एक ईमानदार आईना और सफ़ाई करने वाला कालू।
चतुर सियार और कुआँ
कुएँ में गिरा सियार, भोली बकरी और भरोसे की क़ीमत।
कछुआ और घोड़ा
एक नई शर्त पर कछुए और घोड़े की दौड़ (जानी-पहचानी कथा का नया रूप)।
साहित्यिक४ कहानियाँ
आख़िरी पन्ना
एक लेखक, अधूरा अंत और बेटी की सीधी-सी सलाह।
बारिश वाली चिट्ठी
एक अधूरे पते की चिट्ठी जो ठीक घर पहुँची।
डाकघर की खिड़की
एक जन्मदिन की चिट्ठी और बाबू दीनानाथ की आख़िरी गाड़ी।
पुरानी किताब का बुकमार्क
किताब में दबा गुलाब और एक अधूरी बातचीत।
हास्य४ कहानियाँ
चाय की उधारी
एक चाय की दुकान की बही और उधार चुकाने का अनोखा सौदा।
नकली घड़ी
तीन सौ की स्विस घड़ी और लल्लन चाचा की ईमानदार पर्ची।
परीक्षा का दिन
परीक्षा की रात दराज़ साफ़ करता गुड्डू।
चाय की पहली चुस्की
शर्मा जी की फीकी चाय और पत्नी की कुर्सी का राज़।
लघुकथा३ कहानियाँ
रेल की खिड़की से
रात की गाड़ी में एक दादी और पहली पहल करने का साहस।
आख़िरी स्टेशन का मास्टर
सूने स्टेशन पर हर गाड़ी के साथ उतरती एक कहानी।
पुल
दो रूठे भाई और नदी पर फिर से बनता पुल।
व्यंग्य३ कहानियाँ
फ़ाइल नंबर सत्रह
एक बेंच की मरम्मत की अर्ज़ी और सत्रह मेज़ों की यात्रा।
मोबाइल का नेटवर्क
छत के एक कोने के नेटवर्क पर शर्माजी की कमाई और अकेलापन।
नेता जी का भाषण
वादों की भीड़ में एक बूढ़े का एक ही सवाल।